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बेवड़ों की बददुआ नहीं झेल सका सबसे बड़ा शराब माफिया
राजधानी के चर्चित शराब माफिया ने इतनी बड़ी स्ट्राइक पहले कभी नहीं झेली। पुराने शराब कमिश्नर जाते-जाते खूंटा ठोक गए तो नए वाले के लिए भी उखाड़ना मुश्किल हो रहा है। पिछले साल राजधानी सहित कई शहरों की ज्यादातर दुकानें कब्जाकर अपनी ही फैक्ट्री की घटिया दारू ज्यादा कीमत पर ख़फाकर अरबों कमाने वाले इस माफिया की इस साल हालत खराब है। पिछले साल जितना कमाया बंद फैक्ट्रियों में उससे ज्यादा नुकसान हो चुका है। काल-कोठरी से बचने जो कुछ खतम किया वो अलग। अब सुना है मुखिया से कुछ सेटिंग बैठी है। इसीलिए नए कमिश्नर बार-बार चांस भी दे रहे हैं। लेकिन मार्केट में चर्चा तो यही है कि दारूवाज माफिया को उन बेवड़ों की बददुआ लगी है जिन्हें उसने दारू की कीमत से ज्यादा पैसा लेकर अपनी फैक्ट्री का पानी पिलाया। खैर...... सुना तो यह भी है कि 🍷गटकने के बाद बेवड़ों का दिमाग काम करना बंद कर देता है और फिर वो गाली या तारीफ, दुआ या बददुआ जो भी देते है वो ❤️ दिल से ही निकलती है, और सटीक 🔫 निशाने पर भी लगती है क्योंकि ये पैसा वे दिनभर पसीना बहाकर कमाते हैं। 🤓🤣
सत्ता और संघटन में सक्रिय शिवपुरी की Ngo लॉबी
चंबल का सबसे शीतल और समझदार जिला माना जाने वाला शिवपुरी इन दिनों एक खुरापाती Ngo लॉबी के कारनामों से चर्चाओं में है। एक बड़े Ngo के माध्यम से सेवा की आड़ में कमाई करोबार शुरू करने वाली इस लॉबी के हर सदस्य ने अपने अलग से भी मिनी ngo तैयार कर लिए और खुद की दुकानों के काउंटर बड़े कर लिए हैं। संघटन और पार्टी के कुछ बड़े नेताओं को झांसे में लेकर एक दशक से ये लॉबी सत्ता और संघटन के मलाईदार पदों पर आसीन हो रही है। टिकट, मंत्री, विधायक के फेर में नहीं बल्कि आयोगों पर कब्जा ngo कारोबार और अब खरीदी - ठेकेदारी से कमाई पर भी काम चल पड़ा है। परिषद् के पैसे पर विदेशों में मौजमस्ती, फर्जी सौदे और खर्चे दिखाकर सरकार को ठगने वाले एक को तो 19 में कमलनाथ ने जेल भेजने की तैयारी कर ली थी, तो दूसरे ने 👩🦽🕵️♀️दिव्यागों 😎💀 के नाम पर दुकान चलाई और 18 में पद से हटने के बाद कार्यालय में ही ठेके चला डाले। लोग कह रहे है! संघटन में पकड़ मजबूत है या नस दबा रखी है ? क्योंकि कैंटीन से लेकर कार्यालय की दिहाड़ी पर भी कमीशन की खबर ऊपर तक पहुंची तो पद तो चला गया, लेकिन पार्टी के कंस्ट्रक्शन का काम अब भी ngo वाज के पास ही है। शिवपुरी का एक और ngo वाज छोटू हाल में आयोग में आ बैठा है । लेकिन सेवा आयोग के हितग्राहियों की नहीं भोपाल वाली 👩🚒 मैडम 👩❤️👩 की हो रही है। लोग कह रहे है, मैडम के 🫦फेर में फंसने वाला छोटू पहला नहीं है। मैडम के चंगुल में जो फंसा उसका निकलना आसान नहीं बल्कि नामुमकिन हो गया। खैर इस ngo वाज लॉबी की करतूतें संघटन में ऊपर तक तो पहुंची हैं, लेकिन देखना है कि एक्सन कब और कितना हो पाता है।
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