अपराध

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गिरिबाला की न्यायालय से गुहार, अधिवक्ताओं से मंथन के लिए मिल रहा कम समय

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भोपाल। अभिनेत्री और मॉडल ट्विशा शर्मा की खुदकुशी मामले में गिरफ्तार पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह की न्यायिक अभिरक्षा बढ़ा दी गई है। मां-बेटे को दहेज प्रताडऩा समेत अन्य धाराओं में गिरफ्तार करने के बाद 2 जून को जेल भेजा गया था। मां-बेटे की पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कराई गई। इस दौरान अपनी तरफ से पूर्व न्यायाधीश ने अपनी पीड़ा न्यायालय के सामने रखी। 

पूर्व न्यायाधीश ने बताया कि उन्हें जेल में जो भी समाचार पत्र दिए जा रहे हैं उनमें प्रकाशित उनसे जुड़े समाचार को काटकर दिया जाता है। इसके अलावा उनके अधिवक्ता से मुलाकात का समय 20 मिनट से ज्यादा किया जाए। इस दौरान बेटा भी उनके साथ रहे। ताकि वे अपनी कानूनी रणनीति पर मंथन कर सके। उनकी तरफ से अदालत को बताया गया कि ट्विशा के परिजन लगातार मीडिया से बातचीत कर रहे हैं। जबकि सर्वोच्च न्यायालय की तरफ से इस पर रोक है। ट्विशा की दवाईयां जब्ती से संबंधित दस्तावेज भी मुहैया नहीं कराने को लेकर उनकी तरफ से आपत्ति जताई गई। इधर, सीबीआई से ट्विशा की दूसरी पीएम रिपोर्ट को लेकर भी बहस हुई। जिसमें सीबीआई ने बताया कि उन्हें अभी तक दोबारा पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिली हैं। 

क्या है मामला 

कटारा हिल्स इलाके में 12 मई को ट्विशा शर्मा ने फांसी लगाई थी। उसके शव को सास और पति भोपाल एम्स फंदे से उतारकर ले गए थे। इस मामले में तमाम विरोध-प्रदर्शन के बाद 15 मार्च को कटारा हिल्स पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया था। मामले के तूल पकडऩे पर सरकार ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। इसी आदेश के बाद पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत भी खारिज हुई थी। जांच के लिए सीबीआई ने तमाम डमी प्रोजेक्शन से लेकर अन्य वैधानिक तरीके अपनाए हैं।