आध्यात्म

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केंद्रीय जेल में तनाव प्रबंधन पर हुआ व्याख्यान, मानसिक विकारों से आती है शारीरिक और मानसिक दुर्बलता

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भोपाल। मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण,जबलपुर की मंशा के अनुसार नुसार एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में मंगलवार को केन्द्रीय जेल भोपाल में तनाव प्रबंधन पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, भोपाल की   सचिव/न्यायाधीश सुनीत अग्रवाल उपस्थित रहीं। 

कार्यशाला में इस्कॉन प्रचारक धर्मेंद्र कृष्ण एवं गिरिधारी गोविन्द दास, अंबुजाक्ष दास, बृहद मृदंग दास द्वारा तनाव प्रबंधन पर अपने व्याख्यान दिए। उन्होंने बताया गया कि मानसिक विकारों के कारण किस प्रकार से शारीरिक दुर्बलता आती है, शरीर बीमारियों से ग्रसित हो जाता है, सामाजिक एवं परिवारिक स्थिति में असंतुलन उत्पन्न हो जाता है। अनावश्यक विवाद उत्पन्न होते है जिसे क्रोध के कारण सरल व्यक्ति के द्वारा क्रोध, गुस्सा लालच, लाभ के कारण व्यक्ति से अपराध हो जाता है और वह परिवार एवं समाज में तिरष्कृत हो जाता है और वह जेल/ कारावास में पहुंच जाता है। मनुष्य को अपने गुस्से क्रोध लोभ अहंकार इत्यादि दोषों से दूर एवं बचकर रहना चाहिए। इस्कॉन प्रचारकों द्वारा जेल बन्दियों को मन को शांत रखने के उपाय बताया गया तथा भजन कीर्तन के माध्यम से मन को शांत रखने के उपाय बताया गया। ताकि तनाव के सुप्रभाव से बचा जा सके। इसके साथ बंदियों के लिए विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम में  सुनीत अग्रवाल न्यायाधीश/ सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण भोपाल ने जेल निरीक्षण किया  एवं बंदियों से उनके प्रकरण में अधिवक्ता उपलब्ध होने की जानकारी प्राप्त की। नि:शुल्क विधिक सहायता के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। इस तनाव प्रबंधन कार्यक्रम में केंद्रीय जेल भोपाल से अतिरिक्त अधीक्षक एम एस मरावी जेलर, दिनेश मुवेल अष्ट कोण प्रभारी एवं जेल प्रशासन के कर्मचारीगण एवं लगभग 800 की संख्या में बन्दीगण उपस्थित हुए।