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सौरभ शर्मा प्रकरण में 29 को चालान पेश करेगी लोकायुक्त टीम

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सौरभ शर्मा, चेतन गौर और शरद जायसवाल के विरुद्ध सात महीने में भी तय नहीं हो सके आरोप 

भोपाल। परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा, उसके साथी चेतन गौर और शरद जायसवाल के खिलाफ लोकायुक्त टीम आगामी 29 जुलाई को न्यायालय में आरोप पत्र (चालान) पेश करेगी। सात महीने बाद भी चालान पेश नहीं होने से नाराज विशेष न्यायाधीश रामप्रताप मिश्र ने जमानत करा चुके तीनों आरोपियों के चालान 29 जुलाई तक पेश करने के निर्देश दिए।  
उल्लेखनीय है कि 19 दिसम्बर 2024 को भोपाल में सौरभ शर्मा के दो ठिकानों पर लोकायुक्त टीम ने छापा मारा था, जिसमें करीब 8 करोड़ की चल-अचल संपत्ति लोकायुक्त को मिली थी। इसके अलावा सौरभ के परिजनों, रिस्तेदारों और दोस्तों, कंपनी-फर्मों और सोसायटी के नाम पर खरीदी गई कई संपत्तियों के दस्तावेज भी मिले थे। इसी दिन छापे के बीच से निकली सौरभ की 52 किलो सोना और 11 करोड़ नकदी से भरी कार को आयकर विभाग की टीम ने मेंडोरी के जंगल में एक फार्म हाऊस के बाहर से जब्त किया था। बड़ी मात्रा में सोना-चांदी और नकदी मिलने पर एक महीने बाद प्रवर्तन निदेशालय ने भी सौरभ शर्मा, चेतन गौर, शरद जायसवाल सहित इनके परिजनों, रिस्तेदारों और फर्म, कंपनियों और सोसायटी से जुड़े लोगों को आरोपी बनाकर छापे मारे थे। इस मामले में विगत 8 अप्रैल को चालान पेश कर चुका है। वहीं सौरभ की माँ, पत्नी, मौसेजे जीजा और साले और एक कंपनी को जमानत भी मिल चुकी है।
आरोप पत्र में देरी से आरोपियों को मिली जमानत  
लोकायुक्त टीम द्वारा करीब साढ़े तीन महीने बाद भी आरोप पत्र पेश नहीं किया तो एक अप्रैल 2025 को भोपाल जिला न्यायालय ने तीनों आरोपियों को जमानत मिल गई। हालांकि ईडी मामले में जमानत नहीं होने से तीनों आरोपी अब तक जेल में हैं।
ईडी मामले में जमानत पर फैसला सुरक्षित
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)मामले में सौरभ शर्मा की दो जमानत अर्जियों पर उच्च न्यायालय जबलपुर में सुनवाई विगत मंगलवार को पूरी हो चुकी है। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकल पीठ ने अर्जियों पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। सौरभ की ओर से दलील दी गई कि जब्त की गई पूरी संपत्ति, जिसमें 52 किलो सोना और 11 करोड़ नगदी शामिल है, वो उसकी नहीं है। धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत ईडी ने मामला दर्ज किया था। भोपाल की जिला सत्र न्यायालय ने 24 अप्रैल को सौरभ की जमानत अर्जी निरस्त कर दी थी। इसके बाद उसने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।