आध्यात्म

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रावण नामक व्यक्ति नहीं, रावणत्व की वृत्ति के विरूद्ध था युद्ध

आध्यात्म

- मानस भवन में अंतराष्ट्रीय प्रवक्ता दीदी मां मन्दाकिनी रामकिंकर का संबोधन

भोपाल। तुलसी मानस प्रतिष्ठान के सहयोग से पंच दिवसीय रामकथा यज्ञ शनिवार को मानस भवन में पंडित रामकिंकर सभागृह में प्रारंभ हुआ। इस अवसर पर युग तुलसी मानस मर्मज्ञ  रामकिंकर की आध्यात्मिक उत्तराधिकारी और मानस की अंतराष्ट्रीय प्रवक्ता दीदी मां मन्दाकिनी रामकिंकर ने कहा कि हम श्रीराम के विजयपर्व को लाखों साल से मनाते हैं क्योंकि वह रावण नामक व्यक्ति नहीं, रावणत्व की वृत्ति के विरूद्ध युद्ध था। भगवान राम विभीषण जी रावण की आतंकवादी प्रवृत्ति की शक्तियों से परिचित थे।
संघषरत व्यक्ति किस तरह से सफलता प्राप्त करें, उसमें भगवान श्रीराम और उनके परम नैष्ठिक सेवक हनुमान जी महाराज की क्या भूमिका और प्रेरणा हो सकती है? पर संबोधन दिया।
उन्होंने लंका काण्ड में वर्णित श्रीरामगीता प्रसंग की चौपाई सुनाते हुए युद्ध और विजय की व्यापक अर्थों में व्याख्या की। दीदी ने
त्रेता में भगवान श्रीराम द्वारा लड़े गए युद्ध और संसार में अन्य युद्धों का अंतर बताते हुए समझाया कि भगवान श्रीराम, रावण नाम के व्यक्ति के सामने नहीं लड़ रहे थे। आज लाखों वर्षों बाद भी प्रभु की लीलाओं का गायन और मंचन करते है। रावण का पुतला बनाकर दहन करते है। रावण की पराजय और श्रीराम की विजय का उत्सव मनाते हैं।
दीदी मंदाकिनी ने कहा कि श्रीराम से पहले रावण अन्य दो महारथियों के द्वारा परास्त हुआ था। बालि ने छ: महीने अपने बाएं हाथ में उसे दबाकर तो सहस्त्रार्जुन ने रावण को युद्ध में पराजित किया था। पर हम न तो बालि की पूजा करते है और न ही सहस्त्रार्जुन की।

कार्यक्रम में ये लोग रहे उपस्थित

ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ गोस्वामी तुलसीदासजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्जवलन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह, रघुनंदन शर्मा, प्रभुदयाल मिश्र, माघवसिंह दांगी आदि समेत रघुनंदन शर्मा, कार्याध्यक्ष, विजय अग्रवाल कोषाध्यक्ष, राजेन्द्र शर्मा संयोजक, प्रभुदयाल मिश्र, प्रधान संपादक तुलसी मानस भारती, अरूण गुप्ता एवं श्रद्धा गुप्ता, संजीव पुरी एवं संध्या पुरी, अशोक भट्ट, महेश सक्सेना, सुशीला शुक्ला, जानकी शुक्ला, शारदा राठौर आदि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन माघवसिंह दांगी और आभार प्रदर्शन  प्रभुदयाल मिश्र ने किया।