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सौरभ के साथी चेतन को मिली 14 दिन की जमानत

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अवैध संपत्ति मामले में जेल में बंद है परिवहन विभाग का पूर्व आरक्षक 
भोपाल। सौ करोड़ से ज्यादा की अनुपातहीन संपत्ति मिलने पर प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज प्रकरण में तीन साथियों के साथ जेल में बंद परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के एक साथी चेतन सिंह गौर को न्यायालय ने पत्नी और जुड़वां बच्चों की देखभाल के लिए बुधवार को 14 दिन (27 दिसम्बर तक) की अस्थायी जमानत दे दी है।

19 दिसम्बर 2024 को भोपाल में सौरभ के ठिकानों पर लोकायुक्त के छापे के दौरान ही रात में आयकर विभाग की टीम को मेंडोरी के जंगल में जिस गाड़ी से 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये की नकदी मिली थी, वह गाड़ी चेतन सिंह गौर के नाम पर ही पंजीकृत थी। इसके अलावा चेतन का नाम पर उन फर्म, कंपनी और संस्थाओं से भी जुड़ा है, जिनमें सौरभ द्वारा परिवहन विभाग से वसूली गई अवैध कमाई लगाने का आरोप है। लगभग सौ करोड़ रुपये की संपत्ति, बड़ी मात्रा में सोना-चांदी मिलने पर एक महीने बाद इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने एफआईआर की तथा सौरभ, चेतन और तीसरे साथी शरद जायसवाल से संपत्ति के संबंध में पूछताछ की। पूछताछ और जांच पड़ताल के बाद ईडी ने सोना-नकदी सहित अन्य संपत्तियों को सौरभ का ही बताया है। लोकायुक्त प्रकरण में तीनों आरोपियों को भोपाल जिला न्यायालय से पहले ही जमानत मिल चुकी है। ईडी मामले में भोपाल जिला न्यायालय के अलावा उच्च न्यायालय जबलपुर से भी सौरभ की जमानत खारिज हो चुकी है। पत्नी और बच्चों की देखभाल के आग्रह पर चेतन द्वारा पूर्व में किए गए जमानत आवेदन को उच्च न्यायालय ने निरस्त कर दिया था।  

मानवीय संवेदनाएं बनी जमानत का आधार
चेतन के वकीलों द्वारा पेश किए गए जमानत आवेदन में दलील दी कि चेतन की शादी वर्ष 2012 में हुई थी और चिकित्सकीय परेशानियों और बांझपन के कारण उसकी पत्नी गर्भधारण नहीं कर पाई। यह भी दलील दी गई कि चेतन की पत्नी ने दो बार आईवीएफ कराया और हैदराबाद में उसका इलाज चल रहा था। 14 जून 2025 को उसने समय से पहले जुड़वां बच्चों (एक लडक़ा और एक लडक़ी) को जन्म दिया। लेकिन उसकी मेडिकल कंडीशंस के कारण दोनों बच्चों को एनआईसीयू में भर्ती कराया गया है। चेतन अपनी पत्नी और बच्चों का एकमात्र देखभाल करने वाला है और ऐसे मौके पर पत्नी और बच्चों के साथ चेतन की मौजूदगी की तत्काल आवश्यकता है। न्यायालय को बताया गया कि उसकी पत्नी स्वयं सर्जरी करा रही है।  ईडी की ओर से न्यायालय में पेश हुए वकील ने आरोपी पक्ष के तथ्यों की पुष्टि तो की, लेकिन चेतन को अंतरिम जमानत दिए जाने का विरोध किया। न्यायालय ने मानवीय संवेदनाओं को आधार बनाकर चेतन को 14 दिन की जमानत देने का आदेश पारित किया।
28 तक ट्रायल कोर्ट में करना होगा आत्मसमर्पण
न्यायालय ने कहा, परिस्थितियों में मामले के गुण-दोष पर विचार किए बिना मानवीय आधार पर यह आवेदन स्वीकार किया जाता है और चेतन सिंह गौर को अस्थायी जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया जाता है। न्यायाधीश प्रमोद कुमार अग्रवाल की अदालत से जारी आदेश में यह भी कहा गया है कि संबंधित ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के लिए पचास हजार रुपए की राशि का एक व्यक्तिगत बॉन्ड और उतनी ही राशि की एक सॉल्वेंट जमानत प्रस्तुत करने पर चेतन सिंह गौर को इस आदेश की प्रमाणित कॉपी मिलने की तारीख से 27 अगस्त 2028 तक अस्थायी जमानत पर रिहा किया जाएगा। साथ ही 28 अगस्त 2025 को या उससे पहले संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया जाएगा। यदि चेतन सिंह गौर इस तारीख को या उससे पहले ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण नहीं करता है तो ट्रायल कोर्ट उसे अदालत में लेने के लिए स्वतंत्र होगा।