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आध्यात्म

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जीवन जीने की कला सिखाती है श्रीमद्-भगवद्-गीता: स्वामिनी सद्विद्यानन्द

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आचार्य शंकर संस्कृतिक एकता न्यास ने गीता जयंती पर आयोजित किया ‘प्रेरणा संवाद’, 

भोपाल। आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास द्वारा एकात्म धाम, वेदान्त साधना केन्द्र, भोपाल में गीता जयंती के पावन अवसर पर स्वामिनी स्वामिनी सद्विद्यानन्द सरस्वती एवं स्वामिनी माँ पूर्णप्रज्ञा की उपस्थिति में ‘श्रीमद्भगवद्गीता का पारायण एवं प्रेरणा संवाद’ का आयोजन किया। आयोजन में बड़ी संख्या में शंकरदूत उपस्थित रहे।  

इस अवसर पर स्वामिनी सद्विद्यानन्द सरस्वती ने कहा कि भगवान दूसरे अध्याय में साधक के जीवन के बारे में बताते है कि साधक का जीवन कैसा चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्तव्य का पालन करना ही स्वधर्म है। अप्राप्त की प्राप्ति ही योग है। अद्वैतामृतवर्षिणीम् श्रीमद्-भगवद्-गीता हमें जीवन जीने की कला सिखाती है। माँ पूर्णप्रज्ञा ने कहा कि गीता यह सन्देश देती है कि जीवन शास्त्र अनुसार होना चाहिए, अर्जुन के माध्यम से अद्वैत अमृत के रूप में हमें गीता प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि गीता के रहस्य को समझाने के लिए आचार्य शंकर ने श्रीमद्भगवद्गीता पर सर्वश्रेष्ठ टीका लिखी,  उपनिषदों का ज्ञान ही भगवतगीता के रूप में है।