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Gossip गुगली: किस्से पर्दे के पीछे से - माननीय और मेडम से पावरफुल लेखाजोखा आफीसर और पेटियां थमाकर वर्षों से लगाई जा रही निलंबन की गुहार
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माननीय और मेडम से पावरफुल लेखाजोखा आफीसर
Gossip गुगली।विद्यालयीन शिक्षा हेतु शिक्षा के मंदिरों में व्यवस्था का जिम्मा संभालने वाले डायरेक्टोरेट में न सरकार में विभाग के मुखिया माननीय की चल रही और न ही डायरेक्टोरेट की स्टेयरिंग थामने वाले मेडम का हुकुम चल रहा है। ऑफिस की कमान इन दिनों यहां के लेखाजोखा अधिकारी संभाले हैं। लेखाजोखा से इतर ये अधिकारी खरीदी से लेकर ठेकेदारों की व्यवस्था तक के सब काम संभाले हैं। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले शिक्षा के मंदिरों में सहायिका की भर्ती का ठेका एक ऐसी अपात्र एजेंसी को थमा दिया है, जिसके पास न योग्यता है, न अनुभव और न ही इतना पैसा है कि तीन सैकड़ा से ज्यादा सहायिकाओं को महीनाभर का वेतन अपनी जेब से दे सके। खैर विभाग में चर्चा है कि एक बार विदायी के बाद यह लेखाजोखा वाले यह साहब तीन-पांच सीआर की भेंट अदा करके आए हैं। सो न अब मेडम की चलेगी, न माननीय की। दोनों ही उनके पास जा रहे लोगों को इन साहब के चेम्बर का रास्ता दिखा रहे हैं। केन्द्र की बिल्डिंग में बैठे मुखबिर बताते हैं कि मेडम और माननीय के हिस्से का हिस्सा लेखा शाखा से होकर जा रहा है।
पेटियां थमाकर वर्षों से लगाई जा रही निलंबन की गुहार
साहब दो-चार पेटी लेलो, लेकिन मुझे निलंबित कर दो! मुझ पर ऐसी कार्रवाई कर दो कि मेरे प्रमोशन में अड़ंगा लग जाए। हेडलाइन पढक़र अचंभा हो सकता है, लेकिन यह सच है। एमपी के वाहन वाले महकमे में यह परंपरा दो दशक से जादा पुरानी है। यहां तीन स्टार वाले नहीं चालते कि उनके कंधे के स्टार बढ़ें और हमें साहब बनाकर ऑफिस की कुर्सी तोडऩी पड़े। वाहन महकमे में 2003 और उससे पहले की भर्ती वाले तीन स्टार वालों की वर्दियां कब की बदल गईं होती। जिनके नाम राजपत्र में छप गए होते और साहब बनकर ऑफिस में बैठे होते, लेकिन गड्डियां थमाकर साहब से लगी गुहारों के बल पर अभी भी तीन स्टार के साथ सडक़ नाप रहे हैं। जो इस महकमे से जुड़ा नहीं, या समझता नहीं, उसे समझ आएगा भी नहीं, लेकिन जो जानते हैं, वे जानते हैं, ऐसा क्यू हो रहा है। क्यों तीन स्टार वाले आज भी कह रहे हैं ‘साहब दो-चार, दस पेटी ले लो लेकिन मुझ पर कार्रवाई कर दो।’
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