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जोगा की री एंट्री के बाद परिवहन में नए सिरे से जम रहीं गोटियां, टेंशन में सवर्ण भाजपाई, इधर कुआं उधर खाई

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जोगा की री एंट्री के बाद परिवहन में नए सिरे से जम रहीं गोटियां

एम पी के परिवहन विभाग में जोगा की पावरफुल री-एंट्री के बाद मैदानी खिलाड़ियों की गोटियां फिर से जमाने लगी हैं। सेवा से निवृत्त बघेल इस बार तुमराम को पटकनी देकर मैदान में खुलकर खेलना चाहते हैं। सुनने में आ रहा है कि पुराने मंत्री के सयाने बक़ील को भी बेवकूफ बनाकर कमाए खोकों से बघेल ही साहब की गारंटी देकर आए हैं। हालांकि तिवारी जी के एडवाइजर के रूप में तो बघेल अब तक भी मैदान संभाले और पर्दे के पीछे दो दूनी चार कर ही रहे थे। फिर भी खबर सच्ची है तो देखना होगा कि पुराने वाले डीपी के फाइनेंसर की तरह बघेल की वसूली भी डूबती है या कमाई का खजाना ओवर फ्लो हो पाता है।


टेंशन में सवर्ण भाजपाई, इधर कुआं उधर खाई

 देश पर नहीं चर्चा सिर्फ मध्य प्रदेश के उन सवर्ण नेताओं की जो भाजपा की जै-जै कार करते नहीं थकते। लेकिन यूजीसी के नए कानून ने उनकी उलझन बढ़ा दी। समाज का बड़ा तबका जो बीजेपी और मोदी के गुणगान किए थकता नहीं था और दरवाजे पर फूल  वाला झंडा थामकर पहुंचने वालों का सम्मान होता था। यूजीसी के नए नियम के बाद से सभी अपने बागी हो बैठे हैं। लोग मोदी को खरी खोटी सुना रहे हैं साथ ही मोदी और भाजपा समर्थकों पर भड़के हुए हैं। ऐसे हालात में जो भी सवर्ण नेता यूजीसी पर सफाई देने का प्रयास करता है। उसे मुंह की खानी पड़ रही है। सोशल मीडिया पर तो और भी बुरा  हाल है। सो बीजेपी के स्वर्ण नेता इस मुद्दे पर मौन तो हैं ही, साथ ही गाहे बगाहे मोदी सरकार के इस निर्णयों को दबी आवाज में कोस भी देते है। उन्हें मालूम है कि पार्टी और मोदी पर सफाई के फेर में समाज रूठा तो नेतागिरी के साथ दबदबा भी धरा रह जाएगा।