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Hidden picture’S Gossip गुगली ।अवैध वसूली से आरटीआई का बैकुंठ वास और वैदिक में बसेरा........ डायरेक्टर के फेर में करोड़ों के कमीशन से चूके ओएसडी
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Hidden picture’S Gossip गुगली ।
अवैध वसूली से आरटीआई का बैकुंठ वास और वैदिक में बसेरा
मध्य प्रदेश से होकर गुजरने वाले देश भर के ट्रक चालकों से अवैध वसूली कर जुटाई नोटो की गाडय़िों से 2003 वाले आरटीआई ने राजधानी की महंगी कॉलोनी में आलीशान विला तैयार किया है । नाम रखा है ‘वैकुंठ’ । वैसे वैकुंठ की भूमि तो 2009 में खरीदी गई वो भी काली कमाई से। इस काली कमाई को छुपाने के लिए जमीन में पिता (अब दिवंगत) को भी हिस्सेदार बनाया है। खास बात यह है कि 5.85 लाख में प्लॉट सिर्फ एक खरीदा लेकिन धाम दो प्लॉटों पर पसरा है। 5cr की इस संपत्ति का फर्जीवाड़ा पकड़ में न आए इसलिए कोलकाता निवासी बताकर एक लोकल दलाल ‘मिश्रा’ के नाम का ---54 नंबर प्लॉट भी वैकुंठ में शामिल कर लिया। वैसे चालाकी की भी हद है, वैकुंठ के आगे Dubey’s नेम प्लेट, कई संपत्तियां, गाडिय़ां भी परिवहन के पुराने नमी दलाल ‘भारद्वाज’ की औरैया निवासी महिला रिश्तेदार के नाम करवा दी है। कॉलोनी के ...-89 पर भी ‘Dubey’s’ का ही नाम चल रहा है। पत्नी के नाम की एक कार सोहागपुर वाले ‘मंगलानी’ के नाम तो दूसरी फर्जी कंपनी के असली डायरेक्टर परिहार के नाम , तीसरी वोल्बो..... के नाम तो चौथी स्कॉर्पियो .... के नाम। चर्चा तो यह भी है कि खूबई कमाने के बाद भाई पॉलीटिक्स में हाथ आजमाने की भी सोच रहा है। भाई ने नर्मदा मैया की परिक्रमा लगाकर पाप धोने और नेताओं की सेवा करके कार्रवाई से बचने की तरकीब निकाली है। सुना है, हाल में समाज वाले महाराज जी को 40 लाख की कार भी भाई ने सप्रेम भेंट दी है। खैर नर्मदापुरम में स्टेशन के सामने रिश्तेदार के नाम पर बना आलीशान ‘वैदिक’ हो या जीवनभर मजदूरी से गुजारा करते रहें पिता के नाम पर गांव में खरीदी करोड़ों की जमीन, या फिर भोपाल में सिस्टर और ‘डांडे’ के साथ पार्टनरशिप में जुटाई गई करोड़ों की संपत्तियां। जांच एजेंसियों की नजर से दूर कुछ भी नहीं। अब देखना है कि सबसे पहले कौन सी एजेंसी का जमीर जगता है और सबसे पहले बैकुंठ , शीतल धाम, वैदिक, बंसल-1 या महादेव वाले टावर वाली परिहार साहब के नाम से चल रही फर्जी कंपनी पर कार्रवाई होती है। देखना यह भी होगा कि संकट आने पर कांग्रेसियों से सेटलमेंट वाले साथी मुरैना वाले नेताजी, भोपाल में रहने वाली मुंहबोली मंत्री दीदी या नर्मदापुरम वाले पीयूष भैया कितना सहयोग कर पाएंगे। भैया को सलाह है कि नेताओं पर ज्यादा भरोसा नहीं करना, क्योंकि जेल में त्यौहार मना रहे सौरभ ने भी यही गलत फहमी पाली थी।
डायरेक्टर के फेर में करोड़ों के कमीशन से चूके ओएसडी
परिवहन की अवैध वसूली के बाद फूड की खरीदी में कमीशन का खेला ठेल रहे माननीय और उनके ओएसडी भी कम नहीं हैं। चैत कटने वाला है, लाखों टन गेहँू, सरसों भरने के लिए वारदाना चाहिए। हाल में इसके लिए कॉन्ट्रैक्ट हुए है। ओएसडी ने बाहर की कंपनी को महंगी दरों पर ठेके की तैयारी पूरी कर ली थी। काम गुपचुप होना था लेकिन भगवान जाने कैसे सब लीक होकर गुड-गोबर हो गया। अचानक एक लोकल ठेकेदार टपक पड़ा, उसने कम कीमत की पर्ची डालकर 50 ‘सीआर’ से ज्यादा के कमीशन का खेल बिगाड़ दिया। ओएसडी की मानें तो इसमें डायरेक्टर की गलती ये है कि कम दर की बोली को अकारण ही निरस्त क्यों नहीं किया। वैसे डायरेक्टर की ईमानदारी की सीमा पर अभी कोई टिप्पणी नहीं क्योंकि मुखिया ने महाराज के मंत्रियों पर लगाम के लिए कुछ अधिकारियों को हिदायत के साथ बैठाया है। सो पर्याप्त ईमानदारी के परिचय के साथ साहब कलम फसाने वाला कोई काम नहीं कर रहे। काम भले सीधे माननीय द्वारा भी क्यों नहीं भेजा गया हो। बता दे कि पुराने वाले यादव जी माननीय को सिक्स सीआर की चोट लगाकर भागे थे।
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