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आध्यात्म

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गणेशोत्सव 27 से, बंगाल के मूर्तिकार दे रहे प्रतिमाओं को अंतिम रूप

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- भेल के शक्ति नगर में बंगाल के मूर्तिकार बना रहे प्रतिमाएं।
भोपाल। राखी और जन्माष्टमी पर्व मनाने के बाद शहर में अब 27 अगस्त से शुरू होने वाले गणेशोत्सव के लिए तैयार प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिए जा रहे हैं। इस बार भी प्रशासन ने सिर्फ 12 फीट ऊंची प्रतिमाएं ही बनाने की अनुमति दी है। इसलिए मूर्तिकार भी नियमों का ध्यान रखकर प्रतिमाएं बनाए हैं।
गणेश उत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। 27 अगस्त से गणेश चतुर्थी पर्व शुरू होकर दस दिवसीय तक चलेगा। इस बार शहर में लगभग 100 बड़े गणेश तथा 500 से अधिक छोटे गणेश प्रतिमाएं विराजेंगी। इसके लिए आयोजन समितियों ने पंडाल लगाना शुरू कर दिया है।
भेल के शक्तिनगर में कलकत्ता से आए मूर्तिकार सुभाष रौनक ने बताया कि अन्य मूर्तिकारों के साथ मिलाकर शहर में करीबन 100 बड़ी प्रतिमाओं को पर्यावरण के अनुकूल मिट्टी और
प्रकृतिक रंगों से मूर्तियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। गणेश मंडलों और घरों में पंडालों को सजाने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। वही व्यापारियों ने भी पूजा सामग्री, सजावट का सामान भी लोगों की पसंद का ध्यान रखते हुए मंगवाने लगे हैं। उधर गणेश मंदिरों में साफ सफाई व रंगरोगन कराया जा चुका है।
तालाब में प्रतिबंध, तैयार हो रहे विसर्जन कुंड
नगर निगम, 6 सितंबर को अनंत चौदास पर होने वाले विसर्जन को देखते हुए संजीव नगर, मालीखेड़ी और बीयू में प्राकृतिक जल स्त्रोतों को विसर्जन घाट का रूप देने लगा है। मालीखेड़ी कुंड में करीब 6 हजार प्रतिमाओं को विसर्जित किया जा सकेगा। इससे शहर के अंदर विसर्जन के दौरान ट्रैफिक दबाव कम करने में मदद मिलेगी। बता दें कि इस साल से भोपाल के तालाबों को प्रदूषण से मुक्त बनाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल बोर्ड ने किसी भी तरह के प्रतिमाओं के विसर्जन पर रोक लगा दी है। इस वजह से नगर निगम ने नए विसर्जन कुंड बनाने जगहों का चयन कर लिया है। महापौर मालती राय ने बताया कि मालीखेड़ी में विसर्जन घाट प्रगति पर है। संजीव नगर समेत बीयू कैम्पस में विसर्जन घाट बनाने के लिए विश्वविद्यालय से चर्चा चल रही है। मंजूरी मिलते ही निगम घाट विकसित कर देगा। बैरागढ़ विसर्जन घाट पहले से विकसित है। यह बड़ा तालाब से 3 किमी दूर है।
अभी तक यहां होता था विसर्जन
पिछले साल तक नगर निगम ने शहर के प्रेमपुरा, खटलापुरा, हथाईखेड़ा डैम, आर्च ब्रिज, बैरागढ़ और मालीखेड़ी घाट पर ही प्रतिमाओं के विसर्जन की व्यवस्था करता रहा है। भोपाल शहर की अलग-अलग क्षेत्र से हजारों छोटी बड़ी मूर्तियां इन घाटों पर विसर्जित की जाती थीं। इसे लेकर पुलिस प्रशासन और नगर निगम व्यवस्थाएं संभालने का काम करता था।