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राजधानी

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फाइलों में दबा प्रशासन का ‘झुग्गी मुक्त राजधानी’ अभियान, झुग्गियों की गिनती से आगे नहीं बढ़ सकी कार्यवाही, मंत्रालय के सामने से होनी थी शुरूआत

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भोपाल। भोपाल को झुग्गी मुक्त राजधानी बनाने के लिए जिला प्रशासन कई बार कार्य योजना बना चुका है। लेकिन एक भी बार यह धरातल पर नहीं उतर सकी। निवर्तमान कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने भी भोपाल की सभी झुग्गी बस्तियों को शासकीय भूमि पर निजी डेव्लपर्स से पीपीपी मॉडल पर आवास निर्माण कराकर विस्थापन के लिए ‘झुग्गी झोंपड़ी पुनर्विकास’ योजना तैयार की थी। हालांकि पहले की तरह तत्कालीन कलेक्टर की यह कार्य योजना भी धरातल पर मूर्तरूप नहीं ले सकी। 

36 सालों में बनी झुग्गी मुक्ति की कई योजनाएं 

भोपाल को झुग्गी मुक्त किए जाने की योजनाएं 1990 से बन रही हैं। लेकिन योजना के धरातल पर उतरने से पहले ही ये कागजों में सिमटती गई हैं।  2024 में झुग्गीमुक्त राजधानी के लिए 9 क्लस्टर में पुनर्वास की योजना बनी थी। शुरुआत वल्लभ भवन के सामने भीम नगर से लेकर बाणगंगा तक से होने की बात कही गई थी। यह योजना भी कागजों से बाहर ही नहीं निकल पाई।

यह थी प्रशासन की विस्थापन कार्य योजना 

मुंबई के स्लम रिडेवलप (एसआरए) मॉडल की तर्ज पर भोपाल को झुग्गी-मुक्त बनाने के लिए सार्वजनिक निजी सहभागिता (पीपीपी) मॉडल प्रस्तावित है। इस योजना के तहत शहर के बीच प्रमुख स्थानों पर बसीं 9 क्लस्टर जोन की झुग्गियों को हटाया जाना था और निजी डेवलपर्स को शासकीय भूमि उपलब्ध कराकर उनके साथ पीपीपी मॉडल पर बहुमंजिला इमारतें बनाकर 24,000 पक्के घर व ईडब्ल्यूएस फ्लैट बनाए जाने थे। अनुबंध के अनुसार निजी डेवलपर्स निर्माणाधीन आवासों या दुकानों के बेचकर अपना लाभ कमा सकेंगे।

वल्लभ भवन और विधानसभा से होनी थी शुरूआत

योजना के पहले चरण में वल्लभ भवन और मप्र विधानसभा के पास स्थित 9 केंद्रीय झुग्गी बस्तियों (भीम नगर, ओम नगर, वल्लभ नगर आदि को हटाया जाना था। निजी बिल्डर्स द्वारा सरकारी जमीनों पर लगभग 45 मीटर तक ऊंची बहुमंजिला इमारतें बनाई जानी थी। इन इमारतों में झुग्गी में रहने वाले पात्र परिवारों को मुफ्त पक्के ईडब्ल्यूएस फ्लैट बनाकर दिए जाने थे। गरीबों को फ्लैट देने के बाद, बची हुई प्राइम जमीनों का उपयोग डेवलपर्स द्वारा व्यवसायिक अथवा निजी आवासीय परियोजनाओं के लिए किया जाना था। 

शहर में बढ़ता जा रहा झुग्गियों का दायरा 

जिला प्रशासन जहां झुग्गियों के विस्थापन और अवैध अतिक्रमण रोकने के दावे कर रहा है। लेकिन शहर में लगातार पुरानी झुग्गी बस्तियां विस्तार ले रही हैं, तथा कई स्थानों पर नई झुग्गियां भी नजर आने लगी हैं। जानकारी के अनुसार दो साल पहले तक शहर में लगभग 1800 एकड़ में फैली 388 झुग्गी बस्तियां थीं, जो अब 2000 एकड़ तक विस्तार ले चुकी हैं। अरेरा हिल्स और बाणगंगा जैसे क्षेत्रों में झुग्गियों के साथ सीमेंट-कंक्रीट के पक्के निर्माण भी हैं, जिनमें दुकानें और छोटे कारखाने भी चल रहे हैं। 

एडीएम बोले पता करता हँू- 

झुग्गी विस्थापन को लेकर बनी प्रशासन की कार्य योजना के क्रियान्वयन की आद्यतन स्थिति के संबंध में एडीएम (मुख्यालय) पीसी शाक्य से जानकारी चाही तो उन्होंने कहा कि मैं ऑफिस में नहीं हँू। पता करता हँू। वहीं एडीएम सुमित पाण्डेय ने फोन रिसीव नहीं किया।