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इंदौर नगर निगम में 119.53 करोड़ का फर्जी बिल घोटाला, ईडी की जांच में फंसे आरोपी सहायक यंत्री और दो ठेकेदार गिरफ्तार

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- पूछताछ के लिए विशेष न्यायालय से मिली 5 जून तक रिमांड

भोपाल/ इंदौर  इंदौर नगर निगम में वर्ष 2018 से 2033 के बीच फर्जी और नकली बिलों, जाली कार्यादेशों, मनगढुंत रिकार्ड और काल्पनिक परियोजनाओं के नाम पर राशि निकालकर किए गए 119.53 करोड़ से अधिक राशि के घोटाल में प्रवर्तन निदेशालय ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध करने के बाद तीन मुख्य आरोपी तत्कालीन सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर एवं ठेकेदार मोहम्मद जाकिर और राहुल बडेरा को गिरफ्तार किया है। तीनों ही आरोपियों को इंदौर के विशेष न्यायालय (पीएमएलए) में प्रस्तुत किया गया। ईडी की मांग पर न्यायालय ने तीनों से पूछताछ के लिए 5 जून तक की रिमांड दी है। 

प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले की जांच इंदौर के एमजी रोड पुलिस स्टेशन में आरोपियों पर दर्ज कराई गई एफआईआर और उन पर दायर आरोप पत्र आधार पर शुरू की थी। आरोप पत्र में  इंदौर नगर निगम के खजाने से फर्जी बिलों, जाली वर्क ऑर्डर, मनगढ़ंत रिकॉर्ड और ऐसे प्रोजेक्ट कार्यों के नाम पर धोखाधड़ी करके पैसे निकालने के आरोप थे, जो असल में कभी हुए ही नहीं थे। ईडी की जांच में पता चला है कि वर्ष 2018 से 2023 के बीच, इंदौर नगर निगम के समक्ष लगभग 119.53 करोड़ रुपये के फर्जी और नकली बिल जमा किए गए थे। ये बिल ऐसे कार्यों के लिए थे जिनका असल में कोई अस्तित्व ही नहीं था। इन जाली और मनगढ़ंत बिलों के आधार पर इंदौर नगर निगम के खजाने से लगभग 86.54 करोड़ रुपये का धोखाधड़ी पूर्ण भुगतान किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि 2018 से पहले भी, इसी तरह के तौर-तरीकों का इस्तेमाल करके लगभग 6.22 करोड़ रुपये के सरकारी फंड का गबन किया गया था। इस प्रकार, धोखाधड़ी की कुल राशि लगभग 92.76 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसे पीएमएलए, 2002 के तहत ‘अपराध से अर्जित संपत्ति’ माना गया है। 

ठेकेदारों ने लगाए फर्जी बिल, एई ने किए भुगतान

ईडी की जांच में सामने आया कि आरोपी ठेकेदारों ने इंदौर नगर निगम में मनगढ़ंत बिल लगाए और सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर के सहयोग से इन बिलों का भुगतान उन फर्मों को किया गया जो उनके ही नियंत्रण में थीं। जिन कामों के बिल लगाए गए, वास्तव में वह काम हुए ही नहीं थे। इस कारण नगर निगम को भारी आर्थिक हानि और आरोपियों को अवैध रूप से लाभ पहुंचा। फर्जी भुगतान के समय अभय सिंह राठौड़, इंदौर नगर निगम में सहायक यंत्री थे, जांच में वे इस घोटाले के मुख्य साजिशकर्ता के रूप में सामने आए हैं। 

उन्होंने ही नकली कार्यादेश तैयार करने और उन्हें प्रोसेस करवाने में अहम भूमिका निभाई। ठेकेदार मोहम्मद ज़ाकिर और राहुल बडेरा ने अपनी स्वामित्व और नियंत्रण वाली फर्मों के माध्यम से इंदौर नगर निगम से लगभग 71.78 करोड़ का भुगतान लिया।

ईडी जब्त कर चुकी है 22.04 करोड़ की नकदी व सामान 

इस मामले में ईडी ने धनशोधन निवारण अधिनियम की धारा 17 के तहत छापा मारकर आरोपियों के ठिकानों पर तलाशी ले चुकी है। इस कार्रवाई में ईडी ने आरोपियों के पास से मिला 22.04 करोड़ रुपये की नकदी और कीमती सामान जब्त किया था।  इसके बाद 3 जुलाई 2025 को लगभग 34 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) भी कर चुकी है। शेष रकम की पड़ताल एवं अन्य संपत्तियों का पता लगाने के लिए जांच जारी है।