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पीडब्ल्यूडी के पूर्व मुख्य अभियंता की 67 करोड़ की संपत्ति कुर्क, पूर्व आबकारी अधिकारी की भी संपत्तियां भी की अटैच
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भोपाल। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दो अलग-अलग मामलों में दो पूर्व अधिकारियों की कुल 85.45 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्तियां कुर्क की है।
प्रवर्तन निदेशालय ने यह कार्रवाई लोक निर्माण विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता गोविंद प्रसाद मेहरा और पूर्व जिला आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया समेत उनके परिजन के खिलाफ की गई है। मेहरा नर्मदापुरम जिले के सैनी गांव में 72 एकड़ में लग्जरी कृषि फार्म हाउस से सुर्खियों में आए थे। इस फार्म हाउस में कॉटेज और स्वीमिंग पूल तो थे ही, मेहरा ने खुद के लिए तालाब भी बनवा रखा था। मंगलवार को ईडी ने मेहरा की 67.25 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की है। वहीं, आबकारी विभाग के अधिकारी भदौरिया ने वैध आय से 459 प्रतिशत अधिक संपत्ति बनाई थी। उनकी 18.20 करोड़ की संपत्ति कुर्क की गई है।
लोकायुक्त छापे में सामने आई ािी 6 करोड़ की अनुपातहीन संपत्ति
ईएनसी मेहरा के मामले की जांच की शुरुआत ईडी ने भोपाल लोकायुक्त पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की थी। जांच में सामने आया कि 4 मार्च 1985 से 29 फरवरी 2024 के बीच नौकरी के दौरान मेहरा ने 4 करोड़ रुपए की वैध आय के मुकाबले 10 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति जोड़ी और खर्च किए। इस तरह करीब 6 करोड़ रुपए की अनुपातहीन संपत्ति सामने आई। मेहरा के ठिकानों पर सर्चिंग के दौरान 8.79 लाख रुपए नकद, 3.51 करोड़ रुपए मूल्य के सोने के आभूषण, चांदी का सामान समेत अन्य कीमती वस्तुएं बरामद की गईं। मेहरा इन संपत्तियों के स्रोत के संबंध में संतोषजनक और प्रमाणित दस्तावेज पेश नहीं कर सके।
कृषि फार्म के नाम पर बनाया आलीशान रिसॉर्ट
ईडी की जांच में खुलासा हुआ था कि मेहरा और उनके परिजन ने सोहागपुर तहसील के सैनी गांव में ‘कस्तूरी कृषि फार्म’ को आलीशान रिसॉर्ट का रूप दिया था। इसमें कॉटेज, आवासीय इमारत, सडक़ें, आर्टिफिशियल जलाशय, खेती के लिए फार्म और अन्य सुविधाएं विकसित की गईं। ईडी की मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, इस संपत्ति का बाजार मूल्य लगभग 49.44 करोड़ रुपए जबकि यहां कराए गए काम की लागत करीब 16 करोड़ रुपए आंकी गई। इसके आधार पर एजेंसी ने पीएमएलए की धारा 5(1) के तहत चल-अचल संपत्तियों को कुर्क किया है। कुर्क संपत्ति में आवासीय भवन, कस्तूरी कृषि फार्म, नकदी, सोने-चांदी के आभूषण और अन्य परिसंपत्तियां शामिल हैं।
भदौरिया पर हुई थी लोकायुक्त की कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय ने पूर्व जिला आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया और उनके परिजन की 18.20 करोड़ रुपए मूल्य की चल-अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। यह कार्रवाई लोकायुक्त पुलिस इंदौर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई। जांच में खुलासा हुआ था कि भदौरिया ने साल 1987 से 31 अगस्त 2025 के बीच नौकरी के दौरान अपनी ज्ञात आय के स्रोतों की तुलना में काफी संपत्ति बनाई है। भदौरिया और उनके परिवार की वैध आय लगभग 2 करोड़ रुपए थी जबकि इस अवधि में उन्होंने करीब 11.18 करोड़ रुपए की संपत्ति अर्जित की। इस प्रकार उनके पास 9.18 करोड़ रुपए की अनुपातहीन संपत्ति पाई गई, जो उनकी वैध आय से करीब 459 प्रतिशत अधिक है। ईडी की छापेमारी के दौरान भदौरिया के ठिकानों और बैंक लॉकरों से भारी मात्रा में नकदी, सोने-चांदी के आभूषण, बुलियन और अन्य कीमती वस्तुएं बरामद की गईं। भदौरिया ने जब्त नकदी और आभूषणों पर अपना स्वामित्व स्वीकार किया, लेकिन उनके स्रोत और खरीद से जुड़े दस्तावेज नहीं दे सके।
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